Wednesday, December 1, 2021

ज्यादा सोचोगे तो दिमाग नाराज हो जाएगा

#team nirogbhav

अधिक सोचना आपको हमेशा प्रभावित करता है। खासकर नकारात्मक बातें दिमाग में बनी रहती हैं। ज्यादा समय तक एक जैसा सोचते रहने से अवसाद और मानसिक हेल्थ जैसी समस्याएं होती है।

क्‍या आप भी किसी ऐसी बात को दिमाग में लिए बैठे हैं, जिसे आप भूलना तो चाहते हैं, लेकिन आपको इससे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बार-बार नकारात्‍मक विचारों के एक ही पैटर्न से गुजरने से ज्‍यादा थका देने वाला काम कुछ नहीं है।

जब हम किसी विषय पर बहुत ज्यादा सोचते रहते हैं, तो दिमाग में विचारों का एक जाल बन जाता है। इस जाल में उलझकर इंसान खुद को नकारात्मक मांनने, सोचने लगता है।

फिर इसकी बुनावट दिमाग को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि विचार हमेशा आपको एक बड़ी बात की तरह लगते हैं। ये भले ही ज्‍यादा महत्‍वहीन हों और भले ही इसे आपके दिमाग ने ही बुना हो, लेकिन इन विचारों से बाहर आना आसान नहीं होता है।

अधिक सोचने के कई खतरे हैं। इस समस्या से बाहर निकालना बेहद जरुरी है। वास्तव में एक मनोवैज्ञानिक विकार नहीं है। अधिक सोचने से बच्‍चों को पोस्ट-ट्रमटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्‍या पैदा हो सकती है।

जब आप समय के साथ अधिक सोचते रहते हैं तो आपके ऊपर ये असर पड़ता है…

उदास या चिंतित रहना

उदासी महसूस करने की शुरुआत हमेशा किसी भी विषय में ज्‍यादा सोचने की आदत से होती है। अधिकांश समय हम पिछली घटनाओं के बारे में सोचते रहते हैं और वर्तमान में हो रही घटनाओं के बारे में चिंतित होते हैं या फिर भविष्य के बारे में अत्यधिक चिंता करते हैं।

ये नकारात्मकता का एक घेरा बनाती है जो लंबे समय तक रहने पर जीवन में निराशा पैदा कर देती हैं। इससे अवसाद और चिंता में बढ़ जाती है

लोगो से दूरी

हमारे व्यवहार या दूसरे व्यक्ति के व्‍यवहार जैसे सामाजिक हालात के बारे में ज्‍यादा सोचने से लोग कठोर निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं , यह लंबे समय में सामाजिक चिंता पैदा कर सकता है और लोगों से दूरी बना सकता है।

काम को प्रभावित करता है

जब हम किसी विषय के बारे में ज्‍यादा सोचने लगते हैं तो ये हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करना शुरू कर देता है। इसका परिणाम ये होता है कि हमें नींद नहीं आती और भूख कम लगने लगती है।

यहां तक कि आप जो कोई भी काम करते है उसमें अपना पूरा योगदान नहीं दे पाते। असली समस्या तब शुरू होती है जब यहकामकाज को प्रभावित करना शुरू कर देती है।

अपनी समस्या के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है. अगर आप भी इस स्थिति से गुजर रहे हैं तो आपको इन बातों का रखें ख्याल

— अपने लगातार से विचारों को समझें। फिर फैसला लें बहुत हुआ, अब इस पर नहीं सोचूंगा।
— अपनी पांचों इंद्रियों पर ध्यान केंद्रित करने से आपको वर्तमान में वापस आने में काफी मदद मिल सकती है.
— गहरी सांसों पर जोर देने से भी नकारात्‍मक विचारों के बोझ से वापस आने में मदद मिलती है.
— माइंडफुलनेस, सांस पर ध्यान केंद्रित करने और जो आप कर रहे हैं उस पर ध्‍यान केंद्रित करने से भी काफी मदद मिलती है.

 

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